Story of Jyoti Chahar will inspire you to overcome your obstacles with courage!

25 March 2017

Jyoti Chahar

मैं ज्योति हरियाणा के एक छोटे से गांव से हूं। हमारी फैमिली में हम 3 बहनें, 1 भाई, मम्मी और पापा हैं। जैसा आम लड़कियों का बचपन होता है, मेरा भी वैसा ही था। बस थोड़ा फर्क ये था कि हम 3 बहनें और 1 भाई है तो हर जगह बहनों और भाई का भेदभाव ज़रूर होता था।

पापा सीआईएसएफ में काम करते थे तो काम की वजह से बाहर ही रहते थे। महीनों में घर आते थे। एक शहर में 4 बच्चों को पढ़ाना, किराए के मकान में रहना और मम्मी का अकेले सबकुछ संभालना बहुत मुश्किल था। मम्मी-पापा हमें पढ़ाना चाहते थे, इसीलिए गांव से हमें नज़फगढ ले आए।

मैंने नजफगढ के हिंदी मीडियम स्कूल से अपनी पढ़ाई की है। और ग्रेजुएशन लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से की। मैं स्कूल के टाइम पर घर से स्कूल और स्कूल से घर जाने वाली लड़की थी। कभी इतना एक्सपोजर मिला नहीं तो जब कॉलेज गई तो ये सब मेरे लिए बहुत नया था। कैसे बिहेव करना है, कैसा जवाब देने है, कैसे बात करनी है, कैसे कपड़े पहनने है, मुझे ये कुछ भी नहीं पता था। मैं लोगों के लिए एक बहनजी टाइप लड़की थी और मुझे लोग यही बोलते थे। मेरा कॉन्फिडेंस जीरो था और इसी वजह से मैं एक बातूनी लड़की बिल्कुल न बात करने वाली लड़की बन गई थी।

कॉलेज के बाद इंटर्नशिप ढूंढने में ही इतना स्ट्रगल करना पड़ा तो जॉब तो बहुत दूर की बात है। मैं जिस चैनल में इंटर्नशिप करती थी, वहां मेरी जॉब लग गई थी लेकिन वहां मेरी जॉब के 2 महीनों की सैलरी मुझे कभी नहीं मिली।

उस  दौरान  नौकरी से घर आते टाइम मेरे पापा का रोड एक्सीडेंट हुआ था। इस टाइम हमें नहीं पता था कि ये एक्सीडेंट इतना बड़ा होगा। उस रात न तो किसी हॉस्पिटल के आईसीयू में जगह मिल रही थी और पापा की हालत सीरियस होती जा रही था। पापा को आईसीयू में एडमिट कराने के भी पैसे हमें अरेंज करने थे। इस एक्सीडेंट में मेरे पापा की याद्दाश्त चली गई थी और वो हम में से किसी को भी नहीं पहचानते थी। हमारे घर में पापा अकेले कमाने वाले सदस्य थे। पापा के इलाज का खर्च, उनकी इतनी महंगी दवाईयां और घर का खर्च और हमारे पास बिल्कुल भी पैसे नहीं थे और मेरी नौकरी से तो पैसे मिलने की उम्मीद भी नहीं थी। फिर इस टाइम मैंने कॉल सेंटर ज्वॉइन किया था, जिसके बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता था।

उसके बाद एक छोटे से मीडिया हाउस में बड़ी मुश्किल से नौकरी मिली, जहां मेरी 6000 सैलरी थी। उसके बाद कुछ और छोटे-बड़े मीडिया हाउस में काम किया। फिर जब हालात बहुत खराब हुए, उस समय मेरे पास कोई नौकरी नहीं था, तब मैंने हर जगह नौकरी के लिए अप्लाई भी किया और इंटरव्यू भी दिया(कई जगह तो मैंने कुछ इंटरव्यू और स्टोरी भी करके दी)। पर इसके बावजूद मुझे कहीं नौकरी नहीं मिल रही थी। फिर बड़ी मुश्किल से एक बड़े मीडिया में नौकरी मिली, वो मेरी फैमिली के लिए बहुत बुरा टाइम था।

इस दौरान मेरे पापा घर से गुम हो गए लेकिन तब वो सीधे उन रास्तों से अपने गांव गए जो उन्हें याद थे, इसलिए 2-3 दिन में हमने पापा को ढूंढ लिया। टाइम के साथ पापा पहले से बेहतर हो रहे थे और डॉक्टर ने उन्हें फिर से नौकरी ज्वॉइन करने के लिए कहा। ऑफिस के पहले ही दिन अफसरों की लापरवाही से मेरे पापा महिपालपुर से गुम हो गए। हमने उन्हें ढूंढने की हर मुमकिल कोशिश की। वहां आसपास के हर इलाके में हम पोस्टर लेकर गली-गली घूमे थे। ये हमारे लिए फिर से मुश्किल वक्त था, क्योंकि दिल्ली की गलियों से पापा को ढूंढना और उनके मिलने के चांस न के बराबर थे। वो इस बार गांव नहीं गए और न ही कभी घर वापस आए। मैं आज भी उनका इंतज़ार करती हूं… रोज़।

इस समय खुद को और परिवार को संभालना बहुत ज़रूरी था और मुश्किल भी था। मेरी मम्मी बहुत स्ट्रॉन्ग है। उन्होंने शुरू से बड़ी हिम्मत से अकेले हम सभी बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और काबिल बनाया। तो मम्मी से ये चीज मैंने सीखी थी। फिर वो कहते हैं ना कि बुरा वक्त आपको सब कुछ सीखा देता है।

मुझे बचपन से ही लिखने और इंटरव्यू लेने का काफी शौक था। मैं स्कूल टाइम से ही राहुल द्रविड, सौरव गांगुली और अनिल कुंबले का इंटरव्यू लेना चाहती थी, इसीलिए मैंने जर्नलिज्म का कोर्स किया और मेरे ब्लॉग बनाने के पीछे भी ये तीनों ही थे। पहले मैंने अपना पर्सनल ब्लॉग बनाया था, जिसमें मैं अपनी पसंद की चीजें और अपने फेवरिट की फोटो और इटरव्यू वगैरह डालती थी। मीडिया हाउस में शुरूआत में आपको अपनी मनमर्जी के आर्टिकल डालने की फ्रीडम नहीं होती तो तब मैंने अपना ये ब्लॉग द मुआ शुरू किया। ब्लॉगिंग से मुझे सुकून मिलता है।

द मुआ ब्लॉग मेरे लिए सबकुछ है। यहां आपको एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल, गॉसिप, एक्सक्लूसिव इंटरव्यू, ट्रैवल और ब्यूटी से जुड़ा हुआ बहुत कुछ इंटरेस्टिंग पढ़ने को मिलेगा। मैं अपने ब्लॉग को इंडिया का नंबर 1 हिंदी एंटरटेनमेंट ब्लॉग बनाना चाहती हूं।

मैं मानती हूं कि हर बुरे वक्त के पास अच्छा टाइम ज़रूर आता है और आप अपनी मेहनत और खुद पर यकीन रखें। मैंने ये बातें हमेशा याद रखी हैं। मैं अपनी तारीफ नहीं कर रही पर मैंने बहुत स्ट्रगल किया है और अपनी मेहनत से खुद को साबित भी किया है। और अभी भी खुद को और बेहतर बनाने की कोशिश में लगी हुई हैं। मेरे बुरे टाइम में मेरे कुछ दोस्तों ने बहुत साथ दिया है। मेरे पास खुद को साबित करने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं था, क्योंकि मेरी मम्मी ने बड़ी मुश्किल से हमें पढ़ाया था, हमारे आर्थिक हालात भी अच्छे नहीं थे और लोगों के पास हमें भला-बुरा बोलने के लिए काफी कुछ था। मैंने सिर्फ अपना काम अच्छे से सीखा और इस लायक बनी।

मेरा प्रेरणास्रोत मेरी मम्मी है।

आप लाइफ में जो भी करना चाहते हैं, उसे पूरे दिल से करो और अपने काम में माहिर बनो। खुद पर भरोसा रखो और मेहनत करते रहो।

I am Woman Of Courage क्योंकि मैं लाइफ में कई बार लड़खड़ाकर गिरी हूं और फिर खुद से उठकर आगे बढ़ी हूं। और गिरकर उठने में बहुत हिम्मत लगती है।

#WomenOfCourage

Share this inspiring story of Jyoti Chahar with friends and family.